**Diagram Details:** The diagram illustrates refraction of a light ray through a rectangular glass slab: - **Mediums:** - Surrounding medium: labeled as "viral madhyam" (rarer medium). - Inside the rectangular slab: labeled as "kach" (glass) and "saghan madhyam" (denser medium). - **Rays and Normals:** - An incident ray from the rarer medium strikes the top surface of the slab, with an arrow labeled "आपतित किरण" (Incident ray). - A vertical line perpendicular to the top interface represents the normal at the first point of incidence. - Inside the glass slab, the ray is refracted towards the normal; an arrow pointing to it is labeled "आपवर्तित किरण" (Refracted ray). Dashed extensions show the original straight path of the ray. - At the bottom surface, a second vertical normal line is drawn. - The ray emerges from the bottom face into the rarer medium, bending away from the normal, with an arrow pointing to it labeled "निर्गत किरण" (Emergent ray).
उत्तर: काँच की आयताकार सिल्ली से अपवर्तन में आपतन कोण निर्गत कोण के बराबर होता है (अर्थात् ), अतः निर्गत किरण सदैव आपतित किरण की दिशा के समांतर होती है तथा दोनों के मध्य की लंबवत दूरी को पार्श्विक विस्थापन (lateral displacement, ) कहते हैं।
चरण-दर-चरण हल
चरण 1: प्रथम पृष्ठ पर अपवर्तन (स्नेल का नियम)
जब प्रकाश की किरण विरल माध्यम (वायु, अपवर्तनांक ) से सघन माध्यम (काँच, अपवर्तनांक ) में प्रवेश करती है, तो यह अभिलंब की ओर झुक जाती है। यहाँ आपतन कोण है तथा अपवर्तन कोण है। स्नेल के नियम के अनुसार आपतन कोण की ज्या और अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात एक स्थिरांक होता है।
चरण 2: द्वितीय पृष्ठ पर आंतरिक कोण का संबंध
चूँकि आयताकार सिल्ली के दोनों विपरीत फलक परस्पर समांतर होते हैं, इसलिए दोनों अंतरापृष्ठों पर खींचे गए दोनों अभिलंब भी परस्पर समांतर होंगे। तिर्यक रेखा द्वारा बने एकांतर अंतःकोण समान होते हैं, अतः द्वितीय पृष्ठ पर आपतन कोण , प्रथम अपवर्तन कोण के बराबर होता है।
चरण 3: द्वितीय पृष्ठ पर अपवर्तन तथा निर्गत कोण
जब किरण काँच (सघन माध्यम) से पुनः विरल माध्यम में निकलती है, तो यह अभिलंब से दूर हट जाती है। यहाँ निर्गत कोण को से दर्शाया गया है। द्वितीय अंतरापृष्ठ पर स्नेल का नियम लागू करने पर प्राप्त होता है।
चरण 4: समीकरणों की तुलना और आपतित तथा निर्गत किरणों का समांतर होना
समीकरणों को गुणा करने पर, , जिससे प्राप्त होता है। अतः आपतन कोण निर्गत कोण के बराबर है, जिसका अर्थ है कि निर्गत किरण, आपतित किरण की मूल दिशा के बिल्कुल समांतर होती है।
चरण 5: पार्श्विक विस्थापन (Lateral Displacement)
यद्यपि निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर होती है, परंतु यह अपनी मूल दिशा से थोड़ा पार्श्व में विस्थापित (खिसक) जाती है। आपतित किरण की मूल दिशा और निर्गत किरण के बीच की लंबवत दूरी को पार्श्विक विस्थापन () कहते हैं, जहाँ सिल्ली की मोटाई है।