सर्वांगसम कैसे करें किसी भीदेर हो जाए

उत्तर: त्रिभुजों को सर्वांगसम सिद्ध करने के लिए 3 संगत भागों (भुजाओं एवं कोणों) की समानता ज्ञात करके उपयुक्त कसौटी (SSS, SAS, ASA, AAS, RHS) लागू की जाती है, जिसके बाद CPCT द्वारा शेष भाग समान सिद्ध होते हैं।

चरण-दर-चरण हल

चरण 1: सर्वांगसमता की मूल अवधारणा को समझना

सर्वांगसम आकृतियाँ वे होती हैं जिनका आकार और माप बिल्कुल बराबर होता है। यदि दो त्रिभुजों को एक दूसरे के ऊपर रखा जाए और वे एक-दूसरे को पूरी तरह ढक लें, तो वे सर्वांगसम कहलाते हैं। इसका अर्थ है कि उनके संगत कोण और संगत भुजाएँ परस्पर समान होती हैं।

चरण 2: सर्वांगसमता की कसौटियों की पहचान

दो त्रिभुजों को सर्वांगसम सिद्ध करने के लिए सभी 6 अंगों की तुलना करने की आवश्यकता नहीं होती। हम केवल 5 मुख्य कसौटियों का उपयोग करते हैं: भुजा-भुजा-भुजा (SSSSSS), भुजा-कोण-भुजा (SASSAS), कोण-भुजा-कोण (ASAASA), कोण-कोण-भुजा (AASAAS), तथा समकोण-कर्ण-भुजा (RHSRHS)।

चरण 3: त्रिभुज में 3 संगत समान अंग खोजना

प्रश्न में दिए गए दोनों त्रिभुजों को अलग-अलग देखें। प्रश्न में दी गई जानकारियों, उभयनिष्ठ भुजा (common side), शीर्षाभिमुख कोण (vertically opposite angles), या समांतर रेखाओं के एकांतर कोणों के आधार पर 3 संगत समान भाग ज्ञात करें।

चरण 4: सर्वांगसमता सिद्ध करना और CPCT लागू करना

जैसे ही कोई एक कसौटी संतुष्ट होती है, दोनों त्रिभुज सर्वांगसम सिद्ध हो जाते हैं। इसके बाद सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग (CPCT - Corresponding Parts of Congruent Triangles) के नियम से शेष सभी संगत भुजाएँ और कोण भी बराबर हो जाते हैं।

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